गुरुवार, 11 अगस्त 2011

तू बतला दे मेरे चंदा ....




लाता है सन्देश पिया का ,
उस तक भी पहुंचाता होगा
तू बतला दे मेरे चंदा ,
पी तुझसे तो बतियाता होगा ...

करवट बदलूँ जब रातों में
वो भी नींद गंवाता होगा
जी भर कर जब देखूं तुझको
वो भी नैन मिलाता होगा ...

मद्धम तेरी चांदनी हुई आज
प्रिय छत पर आता ही होगा
अवगुंठन जब खोले सजनी
तू बादल में छिप जाता होगा ...

शीतल चांदनी अंग जलाये
दाह से वो जल जाता होगा
याद उसे जब वो लम्हे आये
लाज से वो शरमाता होगा ...


पलकें मेरी भीगी -सी हैं
वो भी नीर बहाता होगा
फूलों- सी शबनम की चादर
ओढ़ सुबह सो जाता होगा ...


मीठे गीतों की स्वर लहरी
बंसी धुन वो बजाता होगा
तेरे जाने की आहट सुन
अब वो भी घर को आता होगा ...
................................

रविवार, 7 अगस्त 2011

जिंदगी का गणित ऐसा ही है !




बदलते मौसम पर
हैरान क्यों हो !!

नदी का पानी
सोख लेती है कड़ी धूप
बन जाते हैं बादल
बादल घुटेंगे तो
फटेंगे ही ...

प्यार , नफरत ,
ख़ुशी और भय
लौटा देती है
द्विगुणित कर ...
इसका गणित ऐसा ही है !

सरल ,अबोध ,
मासूम,नादान
फिर भी अगम्य ...
इसी का तो नाम है
जिंदगी !

------------------------------------------------------------------
एहतियात जरुरी है 
बोलने -बतियाने में 
लौटा देती है वही 
अनुपात में कुछ अधिक 
तो हैरान क्यूँ।

बताया तो था 
उसने अपना नाम 
जिंदगी!
---------------------------------
मुंह मोड़ कर
हाथ छुड़ा कर
पीठ फेर ली
और चलते गये
नाक की सीध में
भूल गये थे कैसे...
दुनिया गोल है !


शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

जा कर दिया आजाद तुझे ....


जा कर दिया आजाद तुझे मैंने दिल की गहराईओं से

ना माने तो पूछ लेना अपनी ही तन्हाईओं से ...

बादे सबा नहीं लाएगी अब को पैगाम बार
ना करना कोई सवाल आती जाती पुरवाईयों से ...

पीछे छोड़ आये कबकी वो दरोदीवार माजी की
चढ़ने लगे थे रंग जिनपर ज़माने की रुसवाइयों से ...

नजरें चुराए फिरते थे जिन गलियों चौबारों में
अच्छा नहीं था बचते रहना अपनी ही परछाईओं से...

टीसते थे इस कदर जख्म गहरे बेवफ़ाईओं के
भरते नहीं अब किसी बावफा की लुनाईओं से ...



ज्ञानवाणी से प्रकाशित....