1. जो कभी भूल जाऊँ मैं-
भूलते - भूलते
अगर कभी तुम्हें भूल जाऊँ मैं
उस समय को उस पल को दोष नहीं देना
जब पहली बार मिले थे हम तुम!
चाय के उन दो कपों में
खौलती भाप में धुंधले हुए आँसू
जाने खुशी के थे कि दुख के.
झूठ न समझ लेना उस समय को
जब बात करते कभी
हम जोर से खिलखिलाये
कि कभी साथ में गुनगुनाये
गीत वे झूठे नहीं थे
समय के उस पल का सत्य वहीं ठहरा रहा होगा.
उस समय से निकल कर
आगे बढ़ आये होंगे हम
गोल घूमती धरती के
दो भिन्न छोर पर
कभी न मिल पाने को!
2. जो कभी भूल जाओ तुम
कभी तुम जो भूल जाओ मुझे
कम से कम एक बार तो
स्मृति का कोई सिरा पकड़ कर
पहुँच जाऊँगी तुम्हें याद दिलाने
स्वाभिमान आत्मसम्मान
इसमें कुछ न लगेगा
बस एक ही बार लेकिन
मगर सोचो
जो भूलते -भूलते
भूल जाऊँ
स्वयं को ही मैं किसी दिन!
-वाणी गीत


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