हमारी कुंडलियों के ग्रह- नक्षत्रों ने मिलाया हमें
लोंग कहते हैं इन्ही नक्षत्रों ने दिया है हमें
एक संघर्षपूर्ण जीवन ...
मैं हंसती हूँ अक्सर
गृह की मजबूती के आगे नत मस्तक होते हैं ग्रह - नक्षत्र !
यह सिर्फ मेरा आत्मविश्वास नहीं
विश्वास है उस ईश्वर पर
जिसकी अंगुली थामे हम जीवन पथ पर साथ बढ़ते रहे हैं!
कभी प्रेम से ,कभी लड़ते -झगड़ते भी ...
उसने संघर्षों के ज्वालामुखी की आंच पर तपाया है
हमारे इस गठजोड़ को ...
अब किसी से कोई भय नहीं !!!
उस ईश्वर को साक्षी मानकर
अपनों की फेरी नजरों के बीच
तिनका- तिनका जोड़ा हमने आशियाना
एक कमरे की बिना प्लास्टर ,उधडी दीवारों को
हमने बदल दिया घर में ...
और उसने हमें दिया एक खूबसूरत सा दिखने वाला घर भी !
नन्ही चिड़ियों को दाना- पानी दिया हमने और
उसने हमारे घर को भर दिया चहचहाहट से !
अपनी कूचियों के रंग छिड़क कर
रंग बिरंगा कर दिया उसने हमारा आँगन !
उसी ईश्वर को साक्षी मान
तुमने मुझे बहुत कुछ दिया !
दे सकती हूँ मैं जो तुम्हे
वह है सिर्फ एक विश्वास
लौटोगे जब भी घर
जीत कर या हार कर
मैं यही हूँ .....
हमारे बसाये इस घर के सिवा मैं नहीं हूँ ....
कहीं नहीं हूँ !
भर -भर दुआएं और शुभकामनायें दी हैं आप सबको , कुछ प्रतिशत तो लौटायेंगे ना बिना किसी दुर्भावना के ...क्यों , क्या अब यह भी बताना होगा !!!!
इसी अवसर पर एक बहुत प्यारी सी कविता अपने खजाने से ....
