मुझे चाय बहुत भाती है ...
हर रंग में हर रूप में
कभी यूँ ही काली कड़वी सी
कभी उस काली चाय में नीम्बू,
कभी बर्फ ,
कभी दूध डाली चाय
तो कभी उसमे ढे़र सारे मसाले
चाय हर रंग में रूप में मुझे बहुत भाती है
कितनी उबाली जाए
कितनी चीनी
कितने मसाले
कितना दूध
किस प्याले में परोसी जायेगी
बनाने वाला ही तय करता है ....
मगर
जिसे पीना हो
चीनी दूध की मात्रा घटा बढ़ा सकता है
और बन जाती है उसके स्वाद की चाय !
जिंदगी भी मुझे चाय सी ही लगती है ...
जिस रंग में हो
जिस रूप में हो बहुत भाती है ...
कितना खौलेगी
कैसा रंग होगा
कैसा स्वाद ...
बाह्य आवरण कैसा होगा
बनाने वाला ही तय करता है ....
मगर
जिसका जीवन है
घटा- बढ़ा सकता है ख़ुशी या आंसूं
और बन जाता है उसके स्वाद का जीवन ....
जिंदगी मुझे चाय -सी ही लगती है
इसलिए हर रंग में मुझे बहुत भाती है ...

