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शनिवार, 12 मई 2012

इति हैप्पी मदर्स डे !



कही किसी छोटे से घर में 
नन्हे हाथों से बनाये  कार्ड 
बगिया से तोड़ लिया गया एक फूल 
गुल्लक के पैसों से खरीदी चॉकलेट 
या माँ के बालों के लिए क्लचर
गले में बाहें डाल कर 
गालों से गाल सटाकर 
गीली छाती से गर्वोंन्मत 
नन्हे मुन्नों को दुलारते 
निहाल हुई जायेगी कोई माँ !

ऐसे ही 
किसी और ख़ास दिन 
घर के किसी कोने से 
बाहर खींच लाई जाएगी कोई माँ! 
गलियारे से खटिया हटकर 
बैडरूम में सज जाएगी.  
नई सूती साडी में 
चश्मे के पीछे भीगी कोर से 
कुछ पल की ख़ुशी में ही 
पैरों में सिर झुकाते लोगों को 
देगी आशीष 
फूलों के गुलदस्ते होंगे 
हो सकता है मिठाई भी हो.  
मदर्स डे  मनाने लोंग और भी तो आएंगे !
किसी नालायक बेटे की बदजात बहू 
अपने बच्चों की जूठी प्लेट से 
माँ को भोग लगाएगी .
इस एक दिन की ख़ुशी में 
सारी नाइन्सफियों को माफ़ कर 
गंगा  नहाएगी कोई माँ !

ऐसे ही
किसी और दिन 
कमरे की  किसी दिवार पर 
टंगी हुई तस्वीर
किसी ख़ास दिन 
झाड़ पोंछ ली जाएगी 
तस्वीर में कितना  मुस्कुराएगी कोई माँ !
अगरबत्ती सुलगा कर 
दोनों हाथों को जोड़ 
सिर नवा लेंगे  लोंग .
कितनी महान थी मां
सुना कर की जाने वाली बातों के बीच 
होठों में दबे कुछ शब्द 
हमारे लिए क्या छोड़ गयी 
सब तो छोटे को दे गयी .
अच्छी -बुरी स्मृतियों के संग 
जीमे जायेंगे  ढेर पकवान.
हो जायेगा  पुण्य स्मरण 
याद कर ली जाएगी कोई माँ!  

इति हैप्पी मदर्स डे !