बदलते मौसम पर
हैरान क्यों हो !!
नदी का पानी
सोख लेती है कड़ी धूप
बन जाते हैं बादल
बादल घुटेंगे तो
फटेंगे ही ...
प्यार , नफरत ,
ख़ुशी और भय
लौटा देती है
द्विगुणित कर ...
इसका गणित ऐसा ही है !
सरल ,अबोध ,
मासूम,नादान
फिर भी अगम्य ...
इसी का तो नाम है
जिंदगी !
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एहतियात जरुरी है
बोलने -बतियाने में
लौटा देती है वही
अनुपात में कुछ अधिक
तो हैरान क्यूँ।
बताया तो था
उसने अपना नाम
जिंदगी!
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मुंह मोड़ करहाथ छुड़ा कर
पीठ फेर ली
और चलते गये
नाक की सीध में
भूल गये थे कैसे...
दुनिया गोल है !