मेरे अच्छे दिनों के साथी
बचा रखी है कुछ तुम्हारी कल्पनाएँ
बुरे दिनों के लिए मैंने !
जब कभी बेचैनी में नींद न आये
दुबक कर स्मृतियों की दोहर में
लिपट सो रहती हूँ !
मेरे अच्छे समय के साथी!
तुम्हारा हाथ थामे चलते
इन पगडंडियों पर
कुछ हसीं लम्हे चुरा कर रखती गयी हूँ
स्मृतियों की तिजोरी में !
उन दिनों के लिए
जब तुम साथ होकर भी साथ नहीं होते!!

