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शनिवार, 5 दिसंबर 2015
शून्य ही सही!!
तुम
एक से नौ की
कोई संख्या
मैं तुम्हारे बाद का शून्य!
मैं शून्य ही सही
बस तुम्हारे बाद हूँ!!
रविवार, 17 मई 2015
उतरना प्रेम का ......
उतरना प्रेम का .....
दो भिन्न भाव उतरने के!!
उतर रहा सूर्य प्रेम मद भर कर
पहने सतरंगी झालर हो जैसे!
आरक्त कपोल लजवन्ती हौले
खोलती धरा पट घूंघट जैसे!
उतर रहा प्रेम मद रिस कर
घट रहा जल घट का जैसे!
सूखी सरिता मीन तड़पती
मन बंजर धरती का जैसे!
बुधवार, 7 जनवरी 2015
पेट की आग से क्या बड़ी है इनके तन की आग .....
गोद
मे उठाये एक मासूम
पल्लू से सटे दो नन्हे
कालिख से पुते चेहरे
उलझे बाल जटाओं जैसे
बढे पेट के भार से झुकी
दुआएं देती हाथ फैलाये
आ खड़ी हुई द्वार पर ....
तरस खा कर कभी दिया
कभी अनदेखा भी किया
देखे अनदेखे में मगर
सोचा है कई बार....
पेट
की आग से क्या बडी है
इनके तन की आग...
या कि
शीतलता देती हैं उन्हें
जलती हुई नफरत से भरी
कुछ आँखों की आग!!
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