रविवार, 16 मई 2010

उसकी कविता .....मेरी कविता




शब्द -शब्द लड़ पिरोई
एक घटी ना बढ़ी कोई
अभिधा लक्षणा जतन सजाये
अलंकार वसन सुसज्जित
साहित्य सिरमौर हुई
करीने से सजी ताक पर
शीशे के पार झांकती
माथे पर बल डाले
सोचते विचारते
चिंतन मुद्रा में
अनेकानेक अर्थ तलाशते
पढ़ी जायेगी
उसकी कविता .....

अनगढ़ शब्दों में बंधी
खेतों की मुंडेरों पर
सौंधी मिट्टी की खुशबू पगी
मसालों की गंध रची
चूल्हे की आंच सिकी
श्रम स्वेद से नहाई
पोखर किनारे
वस्त्र सुखाते
धूले पुते आँगन में
अल्पना सजाते
गजरा लगाते
मेहँदी रचाते
महावर घुलाते
महकते गमकते
गुनगुनायेंगी सखियाँ
मेरी कविता ....


26 टिप्‍पणियां:

  1. और ये स्वर हमें नए आयाम देंगे, नयी पहचान, नए संकल्प, और क्षितिज अपना हो जायेगा

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  2. वाह!

    बहुत बढ़िया अभिवयक्ति!

    कुंवर जी,

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  3. बहुत बढ़िया बहुत सुन्दर कविता

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  4. देखिये जीवन गणितीय समीकरणों सा निर्धारित...या फिर कोई कृत्रिम अभिविन्यास तो है नहीं इसलिये 'उसकी कविता' मुझे असहज लगती है...अस्तु स्वीकार्य भी नहीं है !... इसके बरअक्स 'मेरी कविता' अपनी नैसर्गिकता और सहजता के चलते ज्यादा आकर्षित कर रही है !


    ( सच कहूं तो आपके इस फिलासोफिकल तेवर से ईर्ष्यालु हो गया हूँ )

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  5. @ अली जी
    कविता गंभीर है तब भी मुझे अस्वीकार्य नहीं है...मैं इन कविताओं को श्रध्दा से सर झुकाती हूँ ...क्यूंकि मैं ऐसा रच नहीं सकती ...मगर मुझे अपनी सहज कविता भी किसी से कम नहीं लगती ..

    इतनी संजीदगी से कविता पढने के लिए बहुत आभार ....

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  6. उसकी और मेरी कविता......सुन्दर शब्दों का समायोजन ....

    अनगढ़ शब्द बहुत खूबसूरती से गठित किये हुए...

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  7. प्यारा लगा..अच्छी हैं आपकी कवितायेँ...बधाई.

    _______________
    'पाखी की दुनिया' में आज मेरी ड्राइंग देखें...

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  8. kya baat hai...
    uski kavita..
    meri kavita.....
    waah kya soch hai...

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  9. Hi..

    Uski kavita padhkar dekhi..
    Meri kavita bhi padh li..
    Dono kavita bhavpurn par..
    Sahaj doosri humko lagi..

    Jisko padhna bhi mushkil ho..
    Janmanas kaise samjhega..
    Aur saraltam shabdon main jo..
    Har maanas usko padh lega..

    Kavita hai bhavon ki abhivyakti..
    Shabd mukhar ho uthte hain..
    Par wo saral agar hon thode..
    Chhand hruday main baste hain..

    Kavita ke dono rup apni apni jagah hain..

    SUNDER KAVITA..

    Aaj se main bhi aapka anusarankarta.. Bahut din se aapko yahan vahan dekh raha tha.. Aaj aapka blog bhi dekha.. Achha likhti hain aap..

    DEEPAK..

    उत्तर देंहटाएं
  10. Hi..

    Uski kavita padhkar dekhi..
    Meri kavita bhi padh li..
    Dono kavita bhavpurn par..
    Sahaj doosri humko lagi..

    Jisko padhna bhi mushkil ho..
    Janmanas kaise samjhega..
    Aur saraltam shabdon main jo..
    Har maanas usko padh lega..

    Kavita hai bhavon ki abhivyakti..
    Shabd mukhar ho uthte hain..
    Par wo saral agar hon thode..
    Chhand hruday main baste hain..

    Kavita ke dono rup apni apni jagah hain..

    SUNDER KAVITA..

    Aaj se main bhi aapka anusarankarta.. Bahut din se aapko yahan vahan dekh raha tha.. Aaj aapka blog bhi dekha.. Achha likhti hain aap..

    DEEPAK..

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  11. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ..सुन्दर भाव लिए हुए

    उत्तर देंहटाएं
  12. चित्र भी सुन्दर और कविता भी.. perfect पोस्ट..

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  13. कविता के तो 'भाव' ही दिल को छूते हैं. 'हाव' मधुर जरूर लग सकते हैं.

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  14. ये कुछ गिरिजेश प्रभाव या उन पर की गयी कविता लगती है प्रथम दृष्टया ! बाकी सल्कन्ते ...

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  15. इस कविता को पढ़कर वह बह्स याद आ गई जो अक्सर कविता की सार्थकता पर की जाती है । लेकिन मै भी इस बात का पक्षधर हूँ कि जन कविता वही होती है जो " श्रम स्वेद से नहाई " होती है । कविता के यही सामाजिक सरोकार भी होने चाहिये । बधाई ।

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  16. सुंदरतम कविता हर मायने में, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम

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  17. रचना उत्तम । वर्तनी सुधारेँ ।

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  18. xcelent job....lekin dono tarah ki ikavitaon ka apna apna mahtva hai ....ek jeevan me rang bharegi..aur ek jeevan ke rangon ko bareeki se dekhegi... behad shandaar lagi aap ki yah rachna...

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  19. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ..सुन्दर भाव लिए हुए ...

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  20. ऐसी कवितायें रोज रोज पढने को नहीं मिलती...इतनी भावपूर्ण कवितायें लिखने के लिए आप को बधाई...शब्द शब्द दिल में उतर गयी.

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  21. वाह!
    उसकी कविता ...मेरी कविता...
    सचमुच है यह प्यारी कविता.
    श्रम स्वेद से नहाई
    मुझे अपनी 'घसियारिन' याद आई.
    स्वीकार करें...
    धन्यवाद और
    ढेर सारी बधाई.

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  22. bahut sundar likha hai aapne...
    uski kavita aur meri kavita ke beech ka dwand sakshat jhalakta hai vastutah kavita samool jit'ti hai!
    dher sari subhkamnayen...

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