गुरुवार, 29 अगस्त 2019

कुछ अधूरा -सा....



रुकी हुई है कलम 
टिकी हुई कागज पर
कि कोई ऐसी बात कह दूँ
कोई सत्य ऐसा लिख दूँ
कि आसमान का पट सरक 
सहसा ही सतरंगी धूप निकल आये...
कि स्याह अँधेरी रात 
झटपट सितारों से जगमगा जाये...

उससे पहले लेकिन
कोई सत्य
कोई किरण 
दृश्य हो ले
जो कहीं किसी  सुनहरे या कि स्याह रैपर में 
अटकी पड़ी है....

रविवार, 31 मार्च 2019

कविता और कुछ नहीं...


कविताएं
और कुछ नहीं
आँसू हैं लिखे हुए....
खुशी की आँच
कि
दुखों के ताप के
अतिरेक से
पोषित
लयबद्ध हुए...

#कविताक्याहै

सोमवार, 18 जून 2018

बनावटें हुज़ूर की..... ख़याल बेबहर



बनावटें हुज़ूर की  किरचों से पूछिये
दोस्ती का जिनके बड़ा चर्चा रहा है...

रिश्ते तमाम लेते रहे हैं जो काम में
रिश्तों  का उनके दर पे सदा मजमा रहा है....

किस खूबी से खेलते हैं खेल देखिये
पासों को खुद ही चलने का गुमान रहा है....

कालिख कलेजे की छलकी जो आँख से
कहते हैं बड़े शौक से कि कजरा रहा है...

बड़े दिनों के बाद बेबहर ख़याल ......