गुरुवार, 15 सितंबर 2016

तब ही समझ तुम पाओगे.....

 पगतलियों के छालों को सहलाते
भींचे लबों से
जब कुछ गुनगुना पाओगे
अश्रु छिपे कितने

मुस्कुराती आँखों के सागर में
तब ही  समझ तुम पाओगे .....

रंग रूप यौवन चंचलता से
नजर चुरा कर
जब मिलने आ पाओगे
सौन्दर्य रूह का कितना उज्जवल
कितना पावन
तब ही समझ तुम पाओगे ....

शनिवार, 5 दिसंबर 2015

शून्य ही सही!!



तुम
एक से नौ की
कोई संख्या
मैं तुम्हारे बाद का शून्य!

मैं शून्य ही सही
बस तुम्हारे बाद हूँ!!

रविवार, 17 मई 2015

उतरना प्रेम का ......

उतरना प्रेम का .....
दो भिन्न भाव उतरने के!!

उतर रहा सूर्य प्रेम मद भर कर
पहने सतरंगी झालर हो जैसे!
आरक्त कपोल लजवन्ती हौले
खोलती धरा पट घूंघट जैसे!

उतर रहा प्रेम मद रिस कर
घट रहा जल घट का जैसे!
सूखी सरिता मीन तड़पती
मन बंजर धरती का जैसे!