सोमवार, 18 जून 2018

बनावटें हुज़ूर की..... ख़याल बेबहर



बनावटें हुज़ूर की  किरचों से पूछिये
दोस्ती का जिनके बड़ा चर्चा रहा है...

रिश्ते तमाम लेते रहे हैं जो काम में
रिश्तों  का उनके दर पे सदा मजमा रहा है....

किस खूबी से खेलते हैं खेल देखिये
पासों को खुद ही चलने का गुमान रहा है....

कालिख कलेजे की छलकी जो आँख से
कहते हैं बड़े शौक से कि कजरा रहा है...

बड़े दिनों के बाद बेबहर ख़याल ......

शनिवार, 1 जुलाई 2017

मौसम तो नहीं कह दिया.....




क्या हुआ है जो बदला है
 इस तरह समां
मौसम तो नहीं कह दिया
 दिवाने को....

गुरुवार, 15 सितंबर 2016

तब ही समझ तुम पाओगे.....

 पगतलियों के छालों को सहलाते
भींचे लबों से
जब कुछ गुनगुना पाओगे
अश्रु छिपे कितने

मुस्कुराती आँखों के सागर में
तब ही  समझ तुम पाओगे .....

रंग रूप यौवन चंचलता से
नजर चुरा कर
जब मिलने आ पाओगे
सौन्दर्य रूह का कितना उज्जवल
कितना पावन
तब ही समझ तुम पाओगे ....