रविवार, 31 मार्च 2019

कविता और कुछ नहीं...


कविताएं
और कुछ नहीं
आँसू हैं लिखे हुए....
खुशी की आँच
कि
दुखों के ताप के
अतिरेक से
पोषित
लयबद्ध हुए...

#कविताक्याहै

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (02-04-2019) को "चेहरे पर लिखा अप्रैल फूल होता है" (चर्चा अंक-3293) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    अन्तर्राष्ट्रीय मूख दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. कवितायें और भी बहुत कुछ हैं ... दिल की आवाज़ हैं ... भावों का एहसास हैं ... हाँ लिखे हुए आंसू भी हैं ...

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  3. वियोगी या गमगीन कवि का उद्घोष।
    सुंदर ।

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 01/04/2019 की बुलेटिन, " मूर्ख दिवस विशेष - आप मूर्ख हैं या समझदार !?“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. या शायद कविता एक एहसास है

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  6. पंक्तियाँ प्रेरित करती हुई बहुत खूब!

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