शनिवार, 5 दिसंबर 2015

शून्य ही सही!!



तुम
एक से नौ की
कोई संख्या
मैं तुम्हारे बाद का शून्य!

मैं शून्य ही सही
बस तुम्हारे बाद हूँ!!

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर..शून्य में ही तो अनंत समाया है..

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    1. आपने शून्यता को बहुत सुन्दर ढंग से परिभाषित किया है । मैं बहुत प्रभावित हुई ।

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  2. तुम मृदु - मानस के भाव और मैं मनोरंजनी - भाषा ।
    तुम नन्दन घन वन विहग और मैं सुख शीतल तरु शाखा ।
    तउ प्राण और मैं काया तुम शुद्ध सच्चिदानन्द ब्रह्म
    मैं मनोमोहिनी माया ।
    निराला

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  3. बहुत खूब, 6 लाइन में सारी भावनाएं, बहुत अच्छा लिखा है

    Hindi Shayari

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  4. शून्य ही है जो सभी संख्याओं का विस्तार करता है । गहन अभिव्यक्ति ।

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