मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

शाम इतनी उदास तन्हा है तबसे !



खूबसूरत स्मृतियाँ तो अंगराग -सी ही हैं जो छूट जाने पर भी खुशबू और रंगत ही देती हैं ...
फिर भी कभी किसी शाम तन्हाई आकर करीब बैठ जाए तो फिर तन्हाई , शाम , उदासी और हम ...फिर तन्हा रहा कौन !!


हर रोज क्षितिज पर
जब धरती आसमान से
गले मिल कर जुदा होती है ...
आसमान में घिर रहा हल्का अँधेरा
शाम की आँखों से बह रहा हो काज़ल जैसे ...

धीरे धीरे शाम ढलती है स्याह अँधेरे में
अपने साये से लिपटकर

उदास शाम के साथ
अपनी उदासी भी भाती है तबसे ....

एक ही राह के हमसफ़र
जो बन गये हैं
उदासी , तन्हाई , शाम और हम ...

बिना गले मिले
बिछड़े थे हम जबसे
शाम इतनी ही उदास तन्हा है तबसे !!!

32 टिप्‍पणियां:

  1. हँसी ख़ुशी से कर रही, वर्षों से मनुहार ।

    मुखड़े पर मुस्कान की, है कबसे दरकार ।

    है कबसे दरकार, उदासी तन्हाई है ।

    सदा जोहता बाट, संदेशा पहुंचाई है ।

    सुन रे ऐ नादान, ख़ुशी जमकर इतराती ।

    जहाँ रहे मुस्कान, वहाँ मैं पहले आती ।।




    दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

    http://dineshkidillagi.blogspot.in

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  2. इसमें कुछ ऐसा है, जो दिल में अटक गया है।
    बिम्ब अच्छे बन पड़े हैं।

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  3. मनोज कुमार ने आपकी पोस्ट " शाम इतनी उदास तन्हा है तबसे ! " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    इसमें कुछ ऐसा है, जो दिल में अटक गया है।
    बिम्ब अच्छे बन पड़े हैं।

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  4. शाम सी अपनी उदासी ... बड़ी गहरी दोस्ती है ----- तन्हाइयां बंट जाती है

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  5. बहुत खूब ....
    ये शामें , ये उदासी औ ये तन्हाई ...
    एक बार आ ,गले से लगा लूँ तुझको
    कुछ यादों के परचम भी मैं लहराऊँ औ
    अश्क के साथ बहा दूँ खुद को .....

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  6. एक ही राह के हमसफ़र
    जो बन गये हैं
    उदासी , तन्हाई , शाम और हम ...
    और मै .... 5..... शुभ हो जाएगा...
    फिर सिर्फ दो होंगे एक मैं और एक आप

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  7. ऐसी घटनायें स्मृतियों का स्याह लाती हैं..

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  8. बिना गले मिले
    बिछडे थे हम जब से
    शाम इतनी ही उदास तनहा है तब से !

    वाह ! दिल को छू गयी ये पंक्ति !
    बेहतरीन कविता !
    आभार !

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  9. होली है होलो हुलस, हाजिर हफ्ता-हाट ।

    चर्चित चर्चा-मंच पर, रविकर जोहे बाट ।


    रविवारीय चर्चा-मंच

    charchamanch.blogspot.com

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  10. शाम , उदासी , तन्हाई...क्या बात है ..बढ़िया कविता.

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  11. वाह!!!
    गले मिल कर बिछड़े होते तो तेरी महक साथ होती...तब कहाँ तनहा होते.....

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  12. कवि के भावों से पाठक को भिगो पाना कविता की सफलता ही है, इस मायने में यह कविता सुन्दर और सक्षम है।

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  13. अदभुत बिम्ब , शाम और दर्द का || लिखते रहिये

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  14. बिना गले मिले
    बिछडे थे हम जब से
    शाम इतनी ही उदास तनहा है तब से !
    साझा अनुभूति की कविता ...

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  15. स्मृति और एहसास
    प्राकृतिक उपलाम्भो के साथ

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  16. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    रंगों के त्यौहार होलिकोत्सव की अग्रिम शुभकामनाएँ!

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  17. बहुत बढ़िया भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन रचना,...

    फालोवर बनगया हूँ आप भी बने मुझे खुशी होगी.
    मेरे पोस्ट आइये स्वागत है,...

    NEW POST...फिर से आई होली...

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  18. बड़े अकलेपन की कविता ..मन हो रहा है गा पडूं..
    जब शाम ढले आना जब दीप जले आना ....
    होली देहरी लांघ चुकी है अब तो मिलन की बाते करो कवयित्री !

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  19. बहुत ही प्यारी रचना है,बधाई आप को

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  20. एक शानदार रचना पढ़ने को मिली।
    बधाइ्र आपकों

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  21. .


    अब तो होली है …
    अजी ख़ुश रहिए …
    तन्हाई और उदासी से इतर रंग की आपकी अगली रचना की प्रतीक्षा रहेगी…

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    ♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
    ♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



    आपको सपरिवार
    होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
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  23. बिना गले मिले
    बिछड़े थे हम जबसे
    शाम इतनी ही उदास तनहा है तबसे .....
    कविता का पोर पोर उस पीड़ा से सराबोर है ...वाह! शब्द नहीं हैं मेरे पास !

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  24. I HOPE YOUR EVENING MUST BE CHEERFUL AND FULL OF EMOTIONS AND WITH JOY.
    BEAUTIFUL EXPRESSION OF EVENING KSHITIJ AND SKY
    AND NICE PICTURE.

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  25. शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चाआज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
    सूचनार्थ

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