मंगलवार, 22 मई 2012

हँसना तो बनता है !!


सुपात्र होने पर भी 
जिनकी जीभ नहीं लपलापायी
मुफ्त का सामान देखकर 
किया हो जिन्होंने न्याय पर विश्वास 
मुफ्त बांटे जाने वाली लाईन में 
बिना धक्का मुक्की किये 
अगली पंक्ति  को लंगड़ी मार कर गिराए बिना 
अपनी बारी का करते इंतज़ार 
रह गये जो सबसे पीछे ...
उनका नंबर आने तक 
खाली हो गयी दाता की झोली!
विधि की कठोरता 
असमानता और अन्याय पर 
करें यदि  सवाल 
सोचना तो बनता है !   

मगर 
पिछली शीत ऋतु में 
जिन गिलहरियों ने  
मुफ्त की मूंगफलियाँ ...
छक कर खाई हों 
मिट्टी में मुंह दबा कर 
मौसम के कहर पर आंसू बहाए आज 
हँसना तो बनता है !!

पिछली शीत ऋतु में ही  
जिसने खाई हो
मुफ्त की रेवड़ियाँ रच कर... 
उनका ही 
ग्रीष्मकालीन अवकाश में कर देना 
तिल की गुणवत्ता  
चीनी -गुड के भाव पर  बवाल 
हँसना तो बनता है!!



42 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया वाणी जी |
    बधाई ||

    मूंगफली भरपेट खा, मुफ्तखोर की खीज |
    खांसी जकड़ी गले को, बड़ी बुरी यह चीज |
    बुरा लगे भाई |

    चापे गुड़ की रेवड़ी, चारबाग़ में बैठ |
    बाढ़े गर मधुमेह तो, जाए मुझसे ऐंठ |
    मेरी क्या खता ?

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    1. आपके शब्द कविता को लयबद्ध कर देते हैं ...
      बहुत आभार !

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  2. रह गए न्याय में तो लुटनेवाले जीत गए
    पर पड़ा जब सूखा तो वे उलट गए
    न्याय की चौखट पर जिसने सीखी सहनशीलता
    उनका हँसना तो बनता है ..... पर ऐसे में हँसना भी क्या , समय ही काफी है अन्याय का विरोध करने के लिए

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  3. ...क्या समय आ गया है जब हंसने के लिए ऐसे बहाने मिलते हैं :-)

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  4. इतनी मजेदार बातो के बाद तो हंसना तो बनता ही है ...सुंदर प्रस्तुति ..बधाई

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  5. सन्दर्भ को समझे बिना हंसने में कितनी कठिनाई होती है , कोई हमसे पूछे :)

    बहरहाल ब्लागजगत की ही कोई राजनीति होगी ये अंदेशा तो है , लेकिन एक बात और , ये ग्रीष्मावकाश का क्या चक्कर है ? कहीं कोई गुरूजी / चेलाजी तो कोपभाजन नहीं बनने वाले :)

    'कोपभाजन' बोले तो 'हंसना तो बनता है' वाले अर्थ में :)

    मुनासिब समझें तो सन्दर्भ की सूचना देने की कृपा करें , आखिर को हम भी थोडा बहुत जान लें कि माज़रा क्या है :)

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  6. वाह!! बहुत ही खूब!!

    हंसना तो बनता है पर दूसरे ही क्षण दया आने लगती है।

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  7. गहरा कटाक्ष ..... सबसे पीछे खड़े हैं हम लाइन में... झोली तो खाली होनी ही थी :):)

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  8. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  9. बहुत खूब
    यकीनन, हंसना तो बनता ही है

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  10. :):) गज़ब गज़ब ...हँसना तो वाकई बनता है :).
    आखिरी पंक्तियाँ तो कमाल .

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  11. मजेदार प्रस्तुति वाणी जी |

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  12. वाह: बहुत मजेदार प्रस्तुति.......वाणी जी..सस्नेह.

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  13. बढ़िया प्रस्तुति व्यंग्य भी विनोद भी मोद भी .
    कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai
    मंगलवार, 22 मई 2012
    :रेड मीट और मख्खन डट के खाओ अल्जाइ -मर्स का जोखिम बढ़ाओ
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  14. Waniji aap apnee baat bahut hee badhiya tareeqese kahtee hain!

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  15. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 24 -05-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... शीर्षक और चित्र .

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  16. बहुत सुंदर वाणी जी । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  17. कमाल की रचना है ...वाणी जी ...!!
    अचूक रहता है आपका लेखन....और परिपक्वता लिये हुए ....तभी वजनदार है लेखनी ....!!!!!!
    बहुत शुभकामनायें....

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  18. वाह वाह वाणी जी......................
    बहुत सुंदर....
    दाद देना तो बनता है .....

    सादर.

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  19. हंसना जरूरी है इसलिए हंसते रहिए। वैसे भी रोने से क्‍या हासिल।

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  20. पूरी की पूरी कविता यहाँ कट पेस्ट करने को जी चाह रहा है ....बहुत ही उम्दा प्रस्तुति वाणिजी

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  21. बहुत मजेदार प्रस्तुति....
    सुन्दर...

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  22. व्यंग भरी इस लाजवाब रचना के लिए साधु वाद ...
    सच है जो इमानदारी से प्रतीक्षा करता है उसको कुछ नहीं मिलता .. पर सबसे ऊपर वाला दाता तो ये सब देख रहा है ...

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  23. बेहतरीन कटाक्ष्…………हंसना तो बनता ही है।

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  24. तीक्ष्ण व्यंग्य है.... जो सचमुच सोचने पर मज़बूर करता है
    बेहतरीन

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  25. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  26. बहुत उम्दा रचना -सोचना तो बनता है|
    हँसना तो बनता है|
    करारा व्यंग

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  27. समझने की कोशिश कर रहे हैं
    जब तक न समझ पाए
    अपनी नासमझी पर हंसना तो बनता है
    जब आ जाएगा समझ
    तो अपनी समझादी पर भी
    हंसना तो बनेगा ही।

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